भारत में फ्लॉप कार्स की लम्बी सूची (Part 4)

मारुती स्टार (2008-2014)

क्यों फ्लॉप हुई : तंग रियर सीट और बूट , वैल्यू फॉर मनी नहीं

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मारुती स्टार  दरअसल फ्लॉप कहलाने की हकदार नहीं है।  मगर इसी प्राइस केटेगरी में दूसरी मारुती कारों से तुलना की जाये तो मारुती वैगनआर, आल्टो, और स्विफ्ट की हर महीने होने सेल्स का 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत भी यह कार हासिल नहीं कर सकी।  एकमात्र दूसरी कार जो फ्लॉप होने के करीब आयी (और इसलिए बंद कर दी गयी) वो थी मारुती जेन एस्टिलो क्योंकि एक बेहतर वैगनआर ने इसे पूरी तरह पीछे छोड़ दिया था।  स्टार वो कार है जो भारत में 67 बीपीएच और 90 एनएम टार्क वाले 1-लीटर केसीरीज इंजन के साथ लांच हुई।  इसमें 5-स्पीड मैनुअल और 4-स्पीड आटोमेटिक विकल्प था (उस वक्त भारत में सबसे सस्ता) . मगर क्यूंकि कीमत के हिसाब से  आकार के दृष्टिकोण से काफी छोटी थी (विश्व भर में आल्टो के नाम से इसकी बिक्री हुई) इसलिए इसे ख़रीददार नहीं मिले। 

मित्सुबिशी सीडीए (2006-2013)

क्यों फ्लॉप हुई : ख़राब मार्केटिंग और सर्विस नेटवर्क , ख़राब फ्यूल इकॉनमी

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मित्सुबिशी सीडीए को सुपर फ्लॉप कारों की लिस्ट में देख कर शुद्धिवादी  शोर मचाएंगे।  मगर इस रैली थोरोब्रेड की मार्केटिंग इतनी मज़बूत नहीं थी की भारत में अधिक लोगों को  इसको खरीदने के लिए मनाया जा सके।  पहली बार 2006 में लॉच हुई मित्सुबिशी सीडीए ड्राइवरस डिलाइट थी।  इसमें 115 बीपीएच और 175 एनएम टार्क  वाला मज़बूत 2-लीटर  इंजन था  और 5-स्पीड मैन्युअल ट्रांसमिशन। कार की हैंडलिंग बेहतरीन थी पर इसकी फ्यूल एफिशिएंसी ख़ास नहीं थी।  इसे 2013 में बंद कर दिया गया।  

निसान टीएना (2007-2014)

क्यों फ्लॉप हुई : ख़राब  इमेज वैल्यू, प्रतिद्वंदियों द्वारा बेहतर मार्केटिंग

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भारत के लक्ज़री सेगमेंट में निसान की गाड़ियों को पर्याप्त खरीददार नहीं मिले। निसान टीएना एक बहुत ही कम्फर्टेबले और स्पेसियस  लक्ज़री कार  है।  इसमें बेहतरीन सनरूफ और मज़बूत 6-सिलिंडर इंजन है। इस कार में 182 बीपीएच पावर और 228 एनएम टार्क वाला 2.5 लीटर का वी-6 पेट्रोल इंजन है।  साथ में सीवीटी आटोमेटिक ट्रान्समिशनं भी है।  मगर कार को स्कोडा सुपर्ब और  टोयोटा कैमरी से काफी टक्कर मिली और ज़्यादा खरीददार नहीं पा सकी।  कार भारत में जनवरी 2015 में  बंद  कर दी गयी थी।  

वॉक्सवैगन पस्सात (2007-2014)

क्यों फ्लॉप हुई : ख़राब सर्विस , ख़राब  इमेज  वैल्यू

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वॉक्सवैगन पस्सात  भारत में 2007 से है और इसमें दो अपग्रेड भी किये गए हैं।  मगर कार लक्ज़री  कार खरीददारों को  अपनी कीमत समझने में विफल  रही है।  इसकी कीमत 23  लाख से 27 लाख के  बीच में थी।  इसमें टेक्नोलॉजी की भरमार थी और कुछ लक्ज़री ब्रांड्स की तुलना  में इसमें कहीं अधिक  फीचर्स थे वो भी किफायती दाम पे।  ये उन पहली गाड़ियो में थी  जो भारत में आटोमेटिक पार्किंग और कैमरा और सेंसर्स के साथ लांच हुई।  मगर इन सभी फीचर्स से ख़राब सर्विस और इमेज की  भरपाई हो सकी।  इस में 140 बीपीएच  और 320 एनएम टार्क वाला 2-लीटर का डीजल इंजन था। 

हुंडई  सोनाटा (2001-2015)

क्यों फ्लॉप हुई :हुंडई की खराब लक्ज़री  इमेज

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हुंडई  सोनाटा हाल ही में बंद हुई है। सोनाटा एक ब्रांड के तौर पर काफी समय से मार्किट में हैं मगर लक्ज़री सेगमेंट में कभी बेहतरीन सेल्स दर्ज नहीं कर सका।  सोनाटा का सबसे  नया संस्करण 2012 में  लांच किया गया  और इसमें  2.4 लीटर का डायरेक्ट इंजेक्शन  वाला इंजन था।  सोनाटा की पहली  कार 2001 में लांच हुई और  जैगुआर की डिजाइन का रिपआफ लगती थी।  इसमें वि-6 3-लीटर पैट्रॉल इंजन था। इसका दूसरा संस्करण 2005 में हुंडई  सोनाटा एम्म्बरा के रूप  में आया और  यही एक  था जो डीजल इंजन  विकल्प में  भी था।  

जहाँ इन सभी करों में काबिलियत थी  और ये अच्छे प्रोडक्ट्स थे , कार निर्माताओं ने फ्लॉप गाड़ियों को बंद करने  का अच्छा फैसला लिया। मगर अभी मार्किट  में कुछ ऐसी कारें  हैं  जो इस सूची में सकती है और कंपनी द्वारा बंद  किये जाने पर हमारी अगली सूची में हो सकती  हैं